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श्री पशुपतिनाथ पाटोत्‍सव एवं मेला

ष्‍टमूर्ति भगवान श्री पशुपतिनाथ के प्रतिष्‍ठोत्‍सव की पावन की स्‍मृति द्वारा प्रतिवर्ष मार्ग शीर्ष कृष्‍ण पंचमी को पाटोत्‍सव समारोहपूर्वक आयोजित किया जाता हैं । इसी दिन शुभ मुहूर्त में विक्रम संवत  2018 में भगवान श्री पशुपतिनाथ की विधि विधान कै साथ प्रतिष्‍ठा हुई थी । मूर्ति के प्रतिष्‍ठात्‍मक स्‍वामी श्री प्रत्‍यक्षानन्‍दजी महाराज के इस उत्‍सव का शुभांरभ किया, जो कार्तिक कृष्‍ण की पूर्णिमा पर इस पवित्र स्‍थल पर असंख्‍य भक्‍तों का अंबार उमर पडता हैं और पशुपतिनाथ महादेव को नमाने वालों की संख्‍या एक लाख से अधिक पॅहुच जाती हैं।
इस अवसर पर प्रतिदिन वेदपाठी ब्राहम्‍णों द्वारा रूद्राभिषेक संत महात्‍माओं के प्रवचन एवं सायंकालीन आरती के समय भगवान श्री पशुपतिना‍थ के नित्‍य जीवन नवीन श्रृंगार किया जाता हैं। विधुतछटा से जगमगाता मंदिर का पूरा परिवेश इतना आर्कषक एवं रमणीय लगता हैं कि सहस्‍त्राधिक संख्‍या दर्शनार्थी श्रद्वालुजन भाव विभोर हुऐ बिना रहते तथा ऐसे श्रृद्वासिक्‍त वातावरण में भगवान श्री  दर्शन कर अपने जीवन को धन्‍य मानते हैं ।
पाटोत्‍सव के इन्‍ही दिनों में सन् 1963 से नगरपालिका ने भी श्री पशुपतिनाथ महादेव मेला आयोजित करना आंरभ किया जो उत्‍तरोत्‍तर प्रगति के साथ प्रतिवर्ष लगता हैं । नगर पालिका द्वारा आयोजित इस मेले में मनोरंजन एवं सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों में साथ ही साहित्यिक कार्यक्रम भी होते हैं । स्‍थानीय एवं दूर-दूर से  गावों व नगरों  से आकर जहॉ वे भगवान श्री पशुपतिनाथ के दर्शन कर आंनदित होते हैं वही व्‍यावसायिक प्रतिष्ठानों का प्रचार प्रसार करते हैं। इसके अतिरिक्‍त मेले में शासकीय गतिविधियों एवं जनल्‍याणकारी विकास के कार्यो की प्रदर्शनियॉ  भी लगाई जाती हैं जिनसे जनसामान्‍य को  यह जानकारी प्राप्‍त हो सके कि हमारे प्रदेश एवं देश में शासन जनहित में निर्धारित योजनाओं को किस प्रकार मूर्तरूप दे प्राप्‍त रहा हैं । मध्‍यप्रदेश का सूचना एवं प्रकाशन विभाग इस प्रकार की प्रदर्शनियॉ आयोजित करता हैं।
राष्‍ट़ीय एकता का परिचायक इस मेले के कारण पूरे समय तक मेला क्षैत्र में ही नही अपितु नगर के प्रमुख मार्गो पर भी चहल पहल रहती है।
श्री पशुपतिनाथ समिति द्वारा आयोजित पाटोत्‍सव के अवसर पर नगर  पालिका के तत्‍वाधान में लगने वाले इस पशुपतिनाथ मेला के अतिरिक्‍त श्रावस मास में प्रति सोमवार एवं महाशिवरात्रि पर्व पर भी दर्शनार्थियों की भारी मात्रा एकत्रित होती हैं जो  अनायास ही मेले का रूप धारण कर लेता हैं। पर्व के इन दिनों में भी रूद्राभिषेक के साथ भगवान श्री पशुपतिनाथ का विशेष पूजन एवं सुन्‍दर श्रृंगार होता हैं वैसे बारह मास प्रात:कालीन आरती के मण्‍डल द्वारा पूजन-अर्चन एवं विशेष अवसर पर अभ्रिषेक किया जाता हैं, जबकि मंदिर प्रबंध समिति सायंकालीन आरती के समय भगवान का इस प्रकार सात्विक श्रृंगार करती हैं कि दर्शनार्थी  मंत्रमुग्‍ध हुए बिना नही रहते । इसी प्रकार पाटोत्‍सव की तिथि पंचमी होने के कारण उसकी स्‍मृति में प्रत्‍येक मास की पंचमी को भी समिति द्वारा अभिषेक एवं विशेष प्रकार का पूजन अर्चन होता हैं।